Ramnavmi Celebration

रामनवमी और हनुमान जयंती समारोह

“राम नाम अति दीप धरु जीह देहरी द्वार ।
तुलसी भीतर बाहेरहुँ जौं चाहसि उजियार ।।”

तुलसी जी के अनुसार मनुष्य यदि अपने अंदर और बाहर दोनों तरफ उजाला चाहते हैं तो अपने मुखरूपी द्वार की जीभरुपी देहलीज़ पर राम नामरूपी मणिदीप को रखें ।
अर्थात श्री राम जी की भक्ति में डूबने के लिए केवल सच्चे मन से राम नाम का उच्चारण मात्र ही काफी है । इसी प्रकार की भक्ति में सराबोर कार्यक्रम गोपाल गार्डन विद्यालय के प्रांगण में किया गया ।

“दुनिया चले न श्री राम के बिना ,
राम जी चले ना हनुमान के बिना ।”

उपर्युक्त काव्यांश की पंक्ति की ही तरह दिनांक १९ अप्रैल को रामनवमी और हनुमान जयंती को एक साथ बहुत ही उत्साह के साथ मनाया गया । सर्वप्रथम दैनंदिन प्रातः समय की प्रार्थना, प्रतिज्ञा से कार्यक्रम की शुरुआत की गई । तत्पश्चात कक्षा दसवीं की छात्रा ‘निधि दुबे’ ने कार्यक्रम को दिशा दी । कक्षा छठीं से लेकर नौवीं के विद्यार्थियों ने शिक्षिका श्रीमती. अमृता के संचालन व निर्देशन में उनके द्वारा स्वरचित चौपाई, रामायण की चौपाई, नवधा भक्ति पर आधारित भक्ति प्रेम, भगवान और भक्त के मिलन तथा उनकी उदारता को शबरी के निच्छल प्रेम भावना को श्री राम और शबरी के मिलन को सुंदर अभिनय द्वारा प्रस्तुत किया गया । इसमें बहुत ही सुंदर संदेश दिया गया कि यदि आस्था और विचार दोनों सच्चे और अच्छे हो तो भगवान और भक्त के मिलन को कोई भी नहीं रोक सकता ।

” धन्य धन्य शबरी तुझे, प्रभु जी मिलने आय।
भगवान सबरी देख के मधुर नेह बरसाय।।”

श्री राम जी के हर भक्त में विशेष बात होती है । उसी प्रकार उनके परम भक्त हनुमान जी को राम नाम से जानते हैं जिन्होंने अपने हृदय को चीर कर पूरे ब्रह्मांड को दिखा दिया था कि उनके ह्रदय में केवल श्री राम और माता सीता की ही छवि बसती है । जिनके पास यह अनमोल खजाना है उन्हें संसार की किसी भी कीमती वस्तु का लोभ नहीं । अतः उनकी महिमा को दर्शाते हुए कक्षा पांचवी और छठी के विद्यार्थियों द्वारा हनुमान भजन को बड़े उत्साह के साथ प्रस्तुत किया गया ।

” पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रुप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

राम नाम को याद करते समय हनुमान जी का स्मरण करने से ही श्री. राम सभी संकटों को हर लेते हैं । अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ ।
जय श्री राम!!